सब्र का बाँध जब टूट तो जाता है कभी,हम अपने ग़मों के सैलाब का मज़ा लेते हैं।सबको नसीब ने बांटा है कुछ न कुछ,उन्हें फूल मुबारक हम कांटों से काम चला लेते हैं।।
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सब्र का बाँध जब टूट तो जाता है कभी,हम अपने ग़मों के सैलाब का मज़ा लेते हैं।सबको नसीब ने बांटा है कुछ न कुछ,उन्हें फूल मुबारक हम कांटों से काम चला लेते हैं।।
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Kabhi to kuch kaha hota,Ki mujhe gurur ho jata..Tu bhi khush hai mere liye,Mere dil ka mehman ho kar...
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Dil me jo aaye kah diya kijiye Rasme ulfat ada kiya kijiye... Kya kar rahe hai.. kahan hain kaise hain.. Itna to humko bata diya kijiye.. ...